6. जीवों में श्वसन
अभ्यास-समीक्षा
- हम जिस वायु को साँस द्वारा अन्दर लेते हैं, उसमें उपस्थित ऑक्सीजन शरीर के सभी भागों में और अंततः प्रत्येक कोशिका में ले जाई जाती हैं। कोशिकाओं में यह ऑक्सीजन भोजन के विखंडन में सहायता कराती हैं। कोशिका में भोजन के विखंडन के प्रक्रम में ऊर्जा मुक्त होती हैं। इसे कोशिकीय श्वसन कहते हैं।
- सभी जीवों की कोशिकाओं में कोशिकीय श्वसन होता हैं।
- कोशिका के अन्दर, भोजन (ग्लूकोस) ऑक्सीजन का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड और जल में विखंडित हो जाता हैं। जब ग्लूकोस का विखंडन ऑक्सीजन के उपयोग द्वारा होता हैं, तो यह वायवीय श्वसन कहलाता हैं।
- ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में भी भोजन विखंडित हो सकता हैं। यह प्रक्रम अवायवीय श्वसन कहलाती हैं।
- भोजन के विखंडन से ऊर्जा निर्मुक्त होती हैं:
ग्लूकोज = ऑक्सीजन के उपयोग के साथ
कार्बन डाइऑक्साइड+जल+ऊर्जा
- ऐसे जीव अवयावीय श्वसन के द्वारा ऊर्जा प्रप्त करते हैं उन्हें अवायवीय जीव कहते हैं।
- अत्यधिक व्यायाम करते समय जब हमारी पेशी कोशिकाओं में ऑक्सीजन की आपूर्ति अपर्याप्त होती हैं, तब भोजन का विखंडन अवायवीय श्वसन द्वारा होता हैं।
- ग्लूकोस विखंडन जीव को कोशिकाओं में होता हैं जिसे कोशिकीय श्वसन कहते हैं।
- शारीरिक सक्रियता के बढ़ने पर श्वसन दर बढ़ जाती हैं।
- पादपों में मूल, मृदा में उपस्थित वायु को ग्रहण करती हैं। पत्तियों में नन्हें छिद्र होते हैं, जिन्हें रंध्र कहते हैं, जिनसे गैंसों का विनिमय होता हैं। पादप कोशिकाओं में ग्लूकोस का विखंडन अन्य जीवों की तरह ही होता हैं।
- अंतः श्वसन या निः श्वसन के समय हमारे फेफड़े विस्तृत होते हैं और उच्छ्वसन के साथ ये अपनी मूल अवस्था में आ सकते हैं।
- गाय, भैंस, कत्ते और बिल्ली जैसे जीवों में श्वसन अंग और श्वसन प्रक्रम मानव के सामान हो होते हैं।
- साँस लेना श्वसन प्रक्रम का एक चरण हैं, जिसमें जीव ऑक्सीजन समृद्ध वायु को शरीर के अन्दर लेता हैं और कार्बन डाइऑक्साइड समृद्ध वायु को बाहर निकालता हैं। गैसों के विनिमय के लिए विभिन्न जीवों में श्वसन अंग भिन्न होते हैं।
- श्वसन सभी जीवों के जीवित रहने के लिए अनिवार्य हैं। यह जीव द्वारा लिए गए भोजन उर्जा को निर्मुक्त करता हैं।
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