7. जंतुओं और पादपों में परिवहन
अध्याय-समीक्षा
- परिसंचरण तंत्र में हृदय और रक्त वाहिनियाँ होती हैं।
- शरीर में से अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकालने का प्रक्रम उत्सर्जन कहलाता हैं।
- मछली अपशिष्ट पदार्थ के रूप में अमेनिया उत्सर्जित कराती हैं, जो सीधे जल में घुल जाती हैं।
- पक्षी कीट और छिपकली अर्ध घन रूप में यूरिक अम्ल का उत्सर्जन करते हैं।
- पादप मूलों द्वारा जल और पोषक तत्त्व मृदा से अवशोषित होते हैं।
- पूरे पादप में जल के साथ पोषक तत्व जाइलम नामक संवहन ऊतक द्वारा ले जाए जाते हैं।
- लवण और यूरिया जल के साथ स्वेद के रूप में शरीर से बाहर निकाल दी जाते हैं।
- मानव उत्सर्जन तंत्र में दो वृक्क, दो मूत्र वाहिनियाँ, एक मूत्राशय और एक मूत्रमार्ग होता हैं।
- पादप के विभिन्न भागों का परिवहन फ्लोएम नामक संवहन ऊतक के द्वारा होता हैं।
- वाष्पोत्सर्जन के दौरान रंध्रों से वाष्प के रूप में बड़ी मात्रा में जल का ग्रास होता हैं।
- वाष्पोत्सर्जन के कारण एक चूषण बल निर्मित होता हैं, जिसके कारण मूलों द्वारा मृदा में से अवशोषित जल अभिकर्षित होकर तने और पत्तियों तक पहुंचता हैं।
- रक्त में प्लाज्मा, लाल रक्त कोशिकाएँ (RBC), श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC) और पट्टिकाओं होते हैं। रक्त का लाल रंग, लाल वर्णकयुक्त हिमोग्लोबिन कि उपस्थिति के कारण होता हैं।
- किसी वयस्क व्यकित हृदय एक मिनट में लगभग 70 – 80 बार धड़कता हैं। इसे हृदय स्पंदन दर कहते हैं।
- मानव शरीर में रक्त, धमनियों और शिराओं में प्रवाहित होता हैं। तथा हृदय पंप की तरह कार्य होता हैं।
- धमनियां हृदय से शरीर के सभी अन्य भागों में रक्त को ले जाती हैं।
- शिराएँ शरीर के सभी भागों से रक्त को वापस हृदय में लाती हैं।
- अधिकांश जंतुओं में शरीर में प्रवाहित होने वाला रक्त शरीर कि विभिन्न कोशिकाओं को भोजन और ऑक्सीजन का वितरण करता हैं। यह शरीर के विभिन्न भागों से उतर्जन के लिए अपशिष्ट पदार्थ को भी लाता हैं।
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